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Raygad ki jaankari

रायगड किल्ला रायरी के जंगल में था ।आदिलशहा के सरदार चंद्रराव मोरे के कब्जे मे यह किल्ला था। चंद्रराव मोरे आदिलशहा के  सरदार थे ।शिवाजी महाराज ने चंद्र राव मोरे को एक जूट होकर साम्राज्य बढाने के लिए खत लिखा था ।लेकिन चंद्रराव मोरे बहुत ही घमंडी थे। उन्होने छत्रपती शिवाजी महाराज को  खत लिखकर उन्ही को सुनाया की  आप कहा के राजे इस जावळी के एकमेव राजे हम है ।तर शिवाजी महाराज ने आपने सैन्य द्वारा उस किले पर कब्जा करने का निश्चय किया । और निकल पडे किला जितने के लिए । पहले छत्रपती शिवाजी महाराज ने मोरे के भाई को शरण मे लाया ।तभी चंद्रराव मोरे बहोत घबराये और वो छत्रपती शिवाजी महाराज के शरण मे आये ।छत्रपती शिवाजी म हाराज जो कोई उनके शरण मे आते उसे कभी नही मारते थे । 1656 मे यह किला स्वराज्य मे सामील हुआ ।

         रायरी के इस किल्ले का नाम रायगड रखा गया ।और इसके  किल्लेदार  चंद्रराव मोरे को बनाया ।हिरोजी इंदुलकर इन्होने किले को  ठीकठाक किया ।उसकी मरम्मत की ।किले पर हत्ती त तालाब, अनाज रखने के लिए जगह,गुप्त चर्चा के लिए एक ऐसी जग बनाई थी ।उसकी किसी को खबर ना लगे । सिद्धेश्वर मंदिर भी बनाया है। हिरकणी की कथा हम सब जानते है, यह हिरकणी बुरुज इस किले का भाग है।

          इस तालाब  की एक कहानी है ।शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक इसी किल्ले पर हुआ था ।इसी राज्याभिषेक के दौरान वहा पर     एक घटना घडी थी |तभी वहा पर हेन्री ऑक्सिंटन नाम का अंग्रेज उपस्थित थे ।उन्होने वहा बहुत बडे ही महाकाय दो हा थी को इस दौरान था । उन्हे बहुत आश्चर्य हुआ इतने बडे और उपर किल्ले पर ये दो हाथी कैसे लाये होंगे ?


             ये सवाल शिवाजी महाराज के सहकारी से किया तभी सहकारी ने बताया यह शिवाजी महाराज के दूरदृष्टी है ।जब रायगड कि ला जिताया गया । तभी किल्ले को  बनाया जा रहा था तभी शिवाजी महाराज के मन मे आया की राज्याभिषेक भी इसी किले मे जरूर होगा । छोटे हा थीयों को किल्ले को तयार करने से पहिले ही उपर लाया था । तभी ये दोनो हाथी बहुत ही छोटे थे । बडे होकर इसी राज्याभिषेक मे काम आयेंगे। वह दो छोटे हा थी ' किल्ले पर बडे हो गये ।राज्याभिषेक तो इसी किल्ले पर होगा यह शिवाजी महाराज ने पहिलेही सोचा था इसी से उनकी दूरदृष्टी पता चलती है ।

इस हत्ती तलाव में उनको स्नान किया जाता था । और पीने का पानी का  भी इंतजाम किया हुआ था । शिरकाई देवी का मंदिर है जो शिवाजी महाराज ने उसे बनाया था ।शिवाजी महाराज ने इस किल्ले पर एक बहुत बडी बाजारपेठ बनवाई थी।अभी भी उस बाजारपेठ के कुछ नमुने वहा पर है ।इसी किल्ले पर शिमगा उत्सव मे शिवाजी महाराज होली की या करते थे ।उसी जगह के नमुने वहा पर है ।शिवाजी महाराज ने इस होली मे एक नारियल डाला करते थे और जो भी होली के आग से उस नारियल को बाहर निकलता था उसे शिवाजी महाराज स्वयं आपने हात का सोने का कडा उसे बक्षीस के तोर पर देते थे।इस प्रथा को शिवाजी महाराज ने ही शुरू किया था ।किले मे बहुत बडा नगर खाना है इस नगार खाने की प्रतिकृती से ही इंडिया गेट की प्रतिमा बनाई गई है । नगारखाने मे सनई चौघडों को रखा जाता था ।जो कोई भी उत्सव मे काम आ सकते थे। नगर खाने के सामने शिवाजी महाराजा का भव्य राज दरबार है ।और उनका भव्य सिंहासन है ।राज्याभिषेक काल मे इसे 32 मन हिरो जवाहिरे से सजाया गया था ।

        किल्ले पर गंगासागर तालाब भी है ।जिसमे साथ विभिन्न नदियों का पानी है । ये पानी शिवाजी महाराज की राज्यभिषेक पर लाया गया था । औ जो भी कुछ पानी बचा था वो इस तालाब मे छोड दिया गया था ।छत्रपती शिवाजी महाराज को आठ पत्नीयाँ थी।

छत्रपती शिवाजी महाराज की पहिली पत्नी सईबाई का देहांत राजगड किल्ले मे हुआ था ।इस किल्ले रा राणीयो के  महल है ।और शिवाजी महाराज के आठ प्रधानो का निवासस्थान है । जिसे अष्टप्रधान मंडल कहते है ।

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