महाबली भीम और बकासुर
महाभारत के समय की यह कथा है। एक गांव सुंदर मनोहरी स्थान पर बसा हुआ था। गांव के आसपास एक बड़ा जंगल था। उस जंगल में बकासुर नाम का राक्षस रहता था।
बकासुर बहुत ही निर्दयि था। जंगल के आसपास के गांव में जाकर लोगों को खाता गांव में जो भी कुछ खाने का समान होता उसको लेकर जंगल में जाता ऐसा वह अक्सर करता रहता था, इसके कारण आसपास के गांव के लोग बहुत दुखी थे क्योंकि किसी के घर में किसकी तो मृत्यु हो जाती थी, या किसी व्यक्ती को बकासुर उठाकर लेकर जाता था।
लोगों ने बकासुर से पीछा छुड़वाने की बहुत कोशिश की मगर वह दानव बहुत बड़ा था और शक्तिशाली भी था साधारण मानव से वह नहीं हार सकता था।
एक दिन सब लोग मिलकर उस बकासुर के पास चले गए और बकासुर के साथ एक समझौता किया की, जितना भी भोजन लगता होगा वह गांव वाले यहां जंगल में घर के पास पहुंचा देंगे और भोजन के साथ एक मानव भी भोजन के लिए दिया जाएगा।
बकासुर यह बात सुनकर बहुत खुश हुआ क्योंकि अब उसे गांव में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी खाना खुद ही उसके पास आने वाला था ऐसा हर रोज चलता रहा।
एक दिन एक दिन पांडव उसे गांव में रहने के लिए आ गए उसमें से बलशाली था महाबली भीम। पांडव जिस घर में रह रहे थे, उसके बेटे को भोजन के तौर पर बकासुर को भेजना था इस कारण बेटे के माता-पिता बहुत रोने लगी यह सब पांडव की माताजी ने सुन लिया और भोजन के साथ भीम जाएगा ऐसा निश्चित किया।
भीम ने भीम गणेश सर भोजन बैलगाड़ी के ऊपर लाभ दिया और बैलगाड़ी को लेकर बकासपुर के हुए के सामने जाकर वह सब भोजन खाने बैठ गए। भीम सर भोजन खा रहा तभी वहां बकासुर आ गया बकासुर ने देखा कि उसका भजन कोई और खा रहा है यह देखकर बकासुर बहुत गुस्से से लाल हो गया और उसमें भीम को एक मुक्का मार दिया। भीम और बकासुर का लड़ाई शुरू हुई लड़ाई बहुत देर तक चली इसमें कोई हार नहीं रही रहा था मगर भी ने भीम ने बकासुर को जोर-जोर से पटकना शुरू किया। बकासुर चोटिल हो गया जोर-जोर से पीटने के कारण बकासुर की मौत हो गई।
बकासुर के मौत की खबर सुनते ही गांव में खुशी की लहर छा गई। और सब लोग महाबली भीम का जय जयकार करने लगे ।
तात्पर्य : बलवान लोगों को हमेशा कमजोर लोगों की सहायता मदद करनी चाहिए।

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