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सुंदर हस्ताक्षर

           

एक लडका था वो स्कूल मे बडे ही अच्छे से ध्यान लगा कर पढाई करता था लेकिन उसे याद नही रहता था वो जितना कुछ पढाई करता वो सब भूल जाता था |
           उसने एक दिनइस पर एक अच्छी तरकीब निकाली जो की उसे याद मे रखने की जरुरत ही ना पडे और वो था हस्ताक्षर | अच्छा हस्ताक्षर लिखने के लिखने के लिए उसने  शुरुवात की . उसका हस्ताक्षर अधिकाधिक बहोत अच्छा आने लगा और उसे सब अक्षर याद रहने लगे |
            टीचर उसके हस्ताक्षर क की बहुत तारीफ करते और उसे बोलते तुम्हारा अक्षर तो अधिकाधिक बहोत सुंदर आने लगा है किसी और की तुलना मे तुम्हारा हस्ताक्षर बहुत अच्छा हैआपने टीचर  द्वारा होने वाले तारीफ की वजह से वो अधिकाधिक मेहनत करणे लगा | उसे लगा किसी एक सब्जेक्ट मे तो मै आगे हू और इससे उसे सुकून मिलता है|
              इस बच्चे का नाम था बाळाजी और समय था छत्रपती शिवाजीमहाराज का उस समय कोई भी किताब की नकल लेखणी द्वारे लिखनी  पडती थी | और उसे लेखनिक बुलाया जाता | महाराज के दरबार में एक लेखक था, लेकिन वो बहुत अच्छा लेखन नही करता था तो राजाने अपने सरदारों से दुसरा बहुत अच्छा लेखन करने वाले को ढूंढने के लाने के लिए कहॉं |
              दुसरे दिन ही सरदार आपने काम मे लग गए ,और उसकी तलाश मे उन्हे बाळाजी का  पता चला जो बहुत अच्छा लेखनिक है | उन्होने कुछ और लोगों के द्वारा लिखे हुए कुछ कागद और बाळाजी का हस्ताक्षर नमुने को महाराज के सामने लेकर आये |
             महाराज को उन सभी हस्ताक्षरो मे बालाजी के हस्ताक्षर बहुत ही पसंद आ गये | बाळाजी को लेखनिक के तोर पर दरबार में रखा गया! इस तरह बाळाजीने जो भी कष्ट उठाया वो सारा कष्ट काम आया, उसकी मेहनत रंग लाई| वह बहुत खुश हुआ |

तात्पर्य: हमे अपने कोई भी कला का सन्मान करना , और उसके लिए मेहनत करनी चाहिए | 

               

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